Friday, 6 January 2012

हीरो मोटोकार्प ने लांच किया हाईब्रिड स्कूटर

देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता हीरो मोटोकार्प ने शुक्रवार को यहां 11वें ऑटो एक्स्पो में भारत के पहले हाईब्रिड स्कूटर के कांसेप्ट का अनावरण किया जिसका विकास एक विदेशी परामर्शक के साथ मिलकर किया गया है।

हीरो मोटोकार्प के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी पवन मुंजाल ने कहा कि यह भारत की हाईब्रिड स्कूटर की पहली श्रृंखला है। हम दुनिया को दिखा रहे हैं कि हम आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय परामर्शक के सहयोग से कांसेप्ट हाईब्रिड स्कूटर लीप का घरेलू स्तर पर विकास किया गया है।

स्कूटर के लांच के बारे में मुंजाल ने कहा कि हमें इसे वाणिज्यिक रूप से लांच करने के संबंध में बहुत काम करना है। इसलिए इसमें कुछ समय लगेगा।

कोमा में सुखराम, सुनवाई टली

वर्ष 1993 के दूरसंचार घोटाले में दोषी साबित पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के वकील ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल कोमा में हैं। उनके वकील ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश धर्मेश शर्मा को बताया कि सुखराम कोमा में चले गए हैं वह अस्पताल से नहीं आ सकते।

सुखराम को उच्चतम न्यायालय ने समर्पण करने का आदेश दिया था। अदालत ने मामले की सुनवाई शनिवार तक के लिए टाल दी है।

सुखराम को कल उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि वह निचली अदालत के समक्ष समर्पण कर दें लेकिन वे इन्हीं चिकित्सा कारणों के आधार पर बच गए। उनके वकील ने कहा था कि सुखराम को ‘कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी एंजियोग्राफी’ के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विशेष न्यायाधीश शर्मा ने सुनवाई कल तक के लिए टाल दी क्योंकि संबंधित विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव जैन आज छुट्टी पर थे। न्यायाधीश ने कहा कि क्योंकि आवेदक दोषी कोमा में चला गया है और न्यायाधीश प्रभारी कल अपनी ड्यूटी पर आएंगे इसलिए मामले को उनके समक्ष विचार के लिए कल सुबह 10 बजे तक के लिए टाला जाता है।

दो अन्य दोषियों पूर्व नौकरशाह रुनू घोष और हैदराबाद के व्यवसायी पी रामा राव ने गुरुवार को निचली अदालत के समक्ष समर्पण कर दिया था। उन्हें क्रमश: दो और तीन साल के लिए जेल भेज दिया गया।

उच्च न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए निर्देश दिया था कि वे कैद की सजा काटने के लिए पांच जनवरी को निचली अदालत के समक्ष समर्पण कर दें। 

दीपक चौरसिया जी, कसम खाओ कि आप हमेशा स्टार न्यूज में ही रहोगे!


Thursday, 5 January 2012

क्या है ज्वालामुखी

अभी पिछले दिनों एक ज्वालामुखी फटा। यह दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर का 'तुंगुरा हुआ' था। बाढ़ आना हमारे देश में सामान्य बात है। साल दो साल में भूकम्प भी आ जाते हैं। ज्वालामुखी से हम बचे हुए हैं। ज्वालामुखी भी अजीब होते हैं। किसी देश में तो ये बिलकुल नहीं होते। कहीं जरा से द्वीप पर कुंडली मारे बैठे रहते हैं। कई देशों में तो दर्जन से ऊपर भी हो सकते हैं। जापान, दक्षिण अमेरिका, मेक्सिको, अलास्का में समुद्र किनारे एक कतार में हैं।

दुनिया के इतिहास में पिछले दस हजार वर्षों में 627 जागृत ज्वालामुखी होना दर्ज है। बीसवीं शताब्दी में 74000 छोटे-बड़े ज्वालामुखी फटने की जानकारी है। जापान के माउंट फूजी, इटली के विसूवियस, सिसली के इटना और अमेरिका के सेंट हेलेना के नाम हम-आप भूगोल की पुस्तकों में पढ़ते रहे हैं।

चाय पीजिए हार्टअटैक और मधुमेह से दूर रहिए

चाय के बड़े फायदे होते हैं और अब एक नए शोध में इसकी पुष्टि की गई है। रोजाना तीन कप चाय पीने वाले व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने और मधुमेह होने का खतरा बेहद कम हो जाता है।

शोध में कहा गया है कि रोजाना चाय की चुस्की लेने से धमनियों में रक्त का थक्का बनने की आशंका लगभग खत्म हो जाती है और रक्तचाप भी नियंत्रण बना रहता है।

समाचार पत्र ‘डेली एक्सप्रेस’ के मुताबिक डॉक्टर कैरी रक्सटन और डॉक्टर पामेला मैसन के नेतृत्व में किए गए शोध में कहा गया है कि रोजाना तीन कप चाय पीने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा 60 फीसदी तक कम हो जाता है और मधुमेह का खतरा भी घट जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग रोजाना तीन से छह कप चाय पीने वाले लोगों में दिल की बीमारी का खतरा 30 से 57 फीसदी तक कम हो सकती है।

डॉक्टर रक्सटन ने कहा कि हमारे अध्ययन में पता चला है कि काली चाय पीने से टाइप 2 के मधुमेह का खतरा कम हो सकता है। इसके लिए रोजाना एक से पांच कप काली चाय पीने की जरूरत है।

वैज्ञानिकों ने की 390 कपालों की जांच मानव कपाल के संबंध में अनूठी जानकारियां


ND

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मानव कपाल अत्यधिक एकीकृत है और उसे एक हिस्से में आने वाले किसी भी बदलाव का असर पूरे कपाल पर पड़ता है। 

इवोल्यूशन पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटिज ऑफ मैनचेस्टर और बार्सिलोना के दल मानव कपालों के विशिष्ट संग्रह का अध्ययन कर रहे हैं। 

उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि मानव कपाल में बदलाव समय के साथ-साथ स्वतंत्र तरीके से हुआ है। इस शोध के लिए वैज्ञानिकों के इन दलों ने 390 कपालों की जांच की।

शोधकर्ता और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के डॉक्टर क्रिस क्लिंजनबर्ग का कहना है कि हमने पाया कि कपाल में आनुवांशिक विविधिता बहुत ज्यादा एकीकृत है। इसलिए अगर कपाल के एक हिस्से में कोई बदालव आता है तो उसके कारण पूरे कपाल में बदलाव आता है।
संबंधित जानकारी

नई समुद्री प्रजातियों की दुनिया खोजी समुद्री जीवों की नई कॉलोनी

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के समुद्र में लगभग 8 हजार फुट नीचे ऐसी नई समुद्री प्रजातियों की दुनिया खोजी है, जो जिंदा रहने के लिए सूरज से नहीं, बल्कि समुद्र में होने वाले ज्वालामुखी से ऊर्जा लेते हैं।

ऑक्सफोर्ड और साउथएम्प्टन यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे की टीम ने अंटार्कटिका समुद्री जीवों की कॉलोनी खोजी है, जिनमें केकड़े, ऑक्टोपस और स्टारफिश शामिल हैं। इनमें केकड़ों के सीने में घुंघराले बाल मिले हैं, जबकि आम केकड़ों में ये नहीं होते हैं। विज्ञान के लिए यह पूरी तरह नई बात है कि ये सारे जीव पूरी तरह अंधेरी दुनिया में जी रहे हैं।

इन समुद्री प्रजातियों के अस्तित्व इस मायने में उल्लेखनीय है कि ये समुद्र के भीतर होने वाले ज्वालामुखी के मुहाने पर विचरते पाए गए हैं। समुद्र के भीतर होने वाली ज्वालामुखी की घटना को हाइड्रोथर्मल वेंट्स कहा जाता है और इसमें काले धुएं का गुबार निकलता है, जो समुद्र के तापमान को 380 डिग्री तक पहुंचा देता है, जो सीसा को पिघलाने के लिए काफी है। 

ND
द डेली मेल अखबार के अनुसार नई प्रजातियां जहां विचरती हैं, वहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती है। वे पूरी तरह अंधेरे में जी रहे हैं। उन्हें ऊर्जा सूरज से नहीं, बल्कि ज्वालामुखी के धुएं से निकलने वाले अत्यंत ही जहरीलों रसायनों से मिलती है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथएम्पटन में भू व समुद्र विज्ञान के प्रोफेसर जॉन कापले ने कहा कि अंटार्कटिका में हाईड्रोथर्मल वेंट्स की खोज और वहां समुद्री जीवों का विचरण पहली बार खोजा गया है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जीव विज्ञान के प्रोफेसर व टीम के प्रमुख एलेक्स रोजर्स ने कहा कि केकड़ों के सीनों में घुंघराले बालों में लाखों की संख्या में जीवाणु मिले हैं, जो केकड़ों को जिंदा रखने में मदद करते हैं। ये जीव समुद्र में और कहीं हाईड्रोथर्मल वेंट्स के आसपास मिले जीवों से एकदम अलग है।

रोजर्स के अनुसार समुद्र के भीतर समुद्री जीवों की यह दुनिया ऐसे लगती है, जैसे किसी और ग्रह से आई हो। इसे देखना बहुत ही मजेदार है। ये दुनिया देखना बहुत ही मजेदार है।