Sunday, 8 January 2012

विज्ञापनी पत्रकारिता के बीच


विज्ञापन के दौर में आ गई पत्रकारिता के लिए यह साल बहुत रोचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। इंदिंरा के बाद कौन, राजीव के बाद जैसे सवालों से भारतीय जनता का सामना हमेशा हुआ। अब अन्ना के बाद कौन। अन्ना के जिस ब्रांड के भरोसे मीडिया का बाजार गुलाबी हुआ, वह बहुत ही जल्द फीका भी पड़ गया। मुद्दे उठे, लाइव रिपोर्टिंग हुई, संसद तक में हंगामा भी पर फिर सब कुछ पूरी तरह से ठस्स।
              
तो यह पत्रकारिता का एक नया चेहरा है। यहां व्यक्ति विशेष या मुद्दा विशेष एकाएक परम जरूरी हो जाता है और फिर एकाएक गायब। पर न्यूज से विज्ञापन गायब नहीं होते। वे अलग-अलग तरीकों से कायम रहते हैं।
 
एक न्यूज चैनल पर हाल ही एंकर जिस लैपटाप का इस्तेमाल कर रहे थे, उस पर मसाले की एक कंपनी का विज्ञापन बचकाने तरीके से चिपक था। कुछ यूं कि विज्ञापन बड़ा और लैपटाप छोटा दिख रहा था। यह सीधा विज्ञापन है। लैपटाप इस कंपनी से मुफ्त मिला है सो हम उसे प्रचारित कर रहे हैं । यह हास्यास्पद है पर बहुत खतरनाक नहीं पर दूसरे विज्ञापन तुरंत जनता की पकड़ में नहीं आते। वारदात में यह बताया जाना कि कैसे शाहरूख खान की फिल्म के आने से पहले पाइरेसी का बाजार चल निकला है और कितने करोड़ का कारोबार करने वाला है, महज खबर नहीं है और महज अपराध नहीं है। यह एक प्रचार है। फिल्मी सितारों का बड़े परे की बजाय छोटे परदे पर ज्यादा समय बिताते हुए बार-बार यह बताना कि किस फिल्म के शूट के दौरान क्या-क्या हुआ भी कोई खबर नहीं है।
 
तो इस साल खबर की दुनिया को गैर-जरूरी प्रचारों से जूझने के बारे में सोचना होगा। जनता फिलहाल नासमझ है पर उसकी नासमझी का थर्मामीटर छ महीने बाद भी यहीं पर टिका रहेगा, यह कतई जरूरी नहीं। कैमरों को अब समाज की तरफ मुड़ने की कोई रणनीति बनानी होगी। जहां पैसा भी आए पर साथ ही मीडिया के मीडिया होने की शर्तें भी पूरी हों। यह जनता है और जनता आखिरकार सब कुछ जानती भी है।  

सिरसा में भाई कन्हिया ट्रस्ट द्वारा बनाये गया (मंदबुधि व बेसहारा ओरतो का) आश्रम का उद्घाटन समारोह


सिरसा 9 जनवरी - सिरसा के भाई कन्हैया ट्रस्ट का छठा वार्षिक समारोह व भाई कन्हैया आश्रम (मनंबुद्वि व बेसाहारा औरतो व बच्चो )का शुभांरभ बड़ी हर्षोल्लास से किया गया कार्यक्रम में मुख्यतिथि के तौर पर आल इंडिया पिंगलवाडा सोसायटी की चेयरपर्सन डा. बीबी इन्द्रजीत कौर ने बतौर मुख्याातिथि शिरकत की वही अतिरिक्त उपायुक्त डी. के बेहरा व पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र यादव ने विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। साथ ही शहरी ब्लाक प्रधान भूपेश मैहता, जिला इनेलो प्रधान पदम जैन, नगर पार्षद रमेश मेहता, अनिल बांगा, हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष बलजीत सिंह, स. सुरेन्द्र सिंह बैदवाला, सुरेश कुक्कू सहित अनेको समाजिक संस्था के सदस्य व अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
 समारोह का आगाज दीप प्रवज्जजित करके किया गया । इस अवसर पर ट्रस्ट के सदस्य भूप सोनी ने ट्रस्ट द्वारा करवाए जा रहे मानवता भलाई के कार्यो के बारे में सभी को बताया व आए हुए अतिथियो का स्वागत किया भूप सिंह ने बताया की इस आश्रम में बेसाहरा व मनंबुद्वि महिलाओं व बच्चों को आसरा दिया जाता है और जब वे ठीक होती है तो उनके घर का पता करके उन्हे उनके घर भेज दिया जाता है वही सदस्यो ने बताया की इसके अलावा ट्रस्ट सिविल हास्पीटल में दाखिल मरीजो को दूध, भोजन व फल की सेवा देती है । भाई कन्हैया आश्रम के प्रधान गुरविन्द्र सिंह ने बताया की ट्रस्ट के सदस्य हमेशा मानवता भलाई के कार्यो में आगे रहते है और उनकी संस्था की चार एंबुलैंस पिछले 4 सालो को अपनी नि:शुल्क सेवा दे रही है यहां तक की हर तीसरे महीन रक्तदान कैंप भी लगाया जाता है जिसमें की काफी संख्या में लोग रक्तदान करते है
        मुख्यातिथि के तौर पहुंची आल इंडिया पिंगलवाडा सोसायटी की चेयरपर्सन डा. बीबी इन्द्रजीत कौर ने बताया की उनके आश्रम भी इस तरह की अनेको बेसाहारा औरते है लेकिन समाज के लोगो को कलंक बताते हुए उन्होने कहा की आज के मां बाप अपने बच्चो के बारे में इतना सोचते पर बेटे उन्हे घर से निकालकर उन्हे बेसाहरा बना देते हैै। यहां तक की 9 महीने पेट में रखकर पालने वाली मां को भी मिन्टो में घर से बाहर निकाल देते है क्या इसी लिए मां अपने बच्चे को पालपोस कर बडा करती है साथ ही बीबी इन्द्रजीत कौर ने लोगो को समाज में फैल रही बुराइयो से भी अवगत करवाया और लोगो से आवहान किया की वे बुराई छोड अच्छाई की और चले साथ ही डा. इन्द्रजीत कौर ने गुरू नानक देव जी जीवनी के बारे में भी लोगो को बताया ।

        इस मौके पर कार्यक्रम में आए संस्था के सदस्यो व गणमान्य लोगो को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया । कार्यक्रम में आश्रम के सेवादार रंजीव गर्ग , ऋषिपाल जिंदल, हरबंस लाल जिंदल, भूप सिंह सोनी, बलराज सिंह बाजवा, हरदेव सिंह ध्ंाजल, मा. नछत्र सिंह, गुरशरण कालडा, राजेश बजाज, मल्लसिंह पटवारी, संजय सिंगला, संजीव जैन एडवोकेट, मेंघनाथ शर्मा, अर्जुन शर्मा, अवनीश कालडा, कृष्ण सिंगला, गुरमीत सिंह उपस्थित रहे।








Friday, 6 January 2012

रोहतांग में साढ़े 3 फीट बर्फ, लाहौल में बस सेवा बंद

कुल्लू/मनाली. कुल्लू की पहाड़ियों पर शुक्रवार को भी बर्फबारी का दौर जारी रहा। रोहतांग में साढ़े तीन फीट बर्फ गिरी है। वहीं, शिमला समेत प्रदेश के कई हिस्सों में भी बर्फ के फाहे गिरते रहे।

केलांग. लाहौल स्पीति में एचआरटीसी ने बस सेवा सेवा बंद कर दी है। कार्यकारी प्रबंधक मंगल चंद मनेपा ने बताया कि बसें चलाना खतरनाक हो सकता है।

सीएम नीतीश से ज्यादा अमीर है उनका बेटा

पटना।। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ज्यादा संपत्ति उनके बेटे निशांत के पास है। यह खुलासा बिहार के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों द्वारा सोमवार को अपनी-अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के बाद हुआ।

इस घोषणा के मुताबिक राज्य के शिक्षा मंत्री पी. के. शाही मंत्रिमंडल के सबसे अमीर सदस्य हैं जबकि सबसे कम संपत्ति के मालिक श्रम संसाधन मंत्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल हैं।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2010-11 के आयकर रिटर्न में जहां एक लाख 62 हजार 193 रुपए की इनकम दिखाई है। वहीं उनके बेटे निशांत को 2,50,410 रुपए की इनकम हुई है। मुख्यमंत्री के पास तीन बैंकों के खाते में करीब 38,000 रुपए हैं, वहीं निशांत के बैंक खाते में 46 लाख रुपए जमा हैं। जूलरी में भी निशांत आगे नजर आ रहे हैं। नीतीश जहां करीब 52 हजार रुपए की जूलरी के मालिक हैं, वहीं उनके पुत्र के पास 11 लाख रुपए से ज्यादा के गहने हैं।

इस तरह नीतीश के पास करीब छह लाख 15 हजार रुपए की और उनके बेटे के पास 73 लाख 60 हजार रुपए की चल संपत्ति है। अचल संपत्ति के मामले में भी निशांत अपने पिता से आगे हैं। निशांत के नाम करीब 42 लाख 69 हजार रुपए की अचल संपत्ति है जबकि नीतीश के पास कुल 40 लाख रुपए की अचल संपत्ति है।

दरअसल, निशांत के नाम नीतीश की अधिकत्तर पैतृक संपत्ति के अलावा उनकी मां से प्राप्त संपत्ति भी है। निशांत की मां एक टीचर थीं, जिनकी मौत हो चुकी है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने खुद और मंत्रिमंडल के सदस्यों के अपनी-अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का वादा किया था। पिछले वर्ष भी इसी समय मंत्रियों ने अपनी-अपनी संपत्तियों के ब्योरा सार्वजनिक किए थे। पिछले वर्ष की तुलना में सभी मंत्रियों के चल और अचल संपत्ति में वृद्धि हुई है। मंत्रियों ने पत्नी और बच्चों के नाम की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा भी सार्वजनिक किया है।

डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ पर निगाहें

बठिण्डा(प्रैसवार्ता) पंजाब विधानसभा के 30 नवंबर को होने जा रहे विधानसभाई चुनावों को लेकर प्रदेशवासियों की नजरें डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ पर टिक गई है, जो चुनावों में अहम् भूमिका निभाने में सक्षम माना जाता है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी अनुसार डेरा  सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ ने डेरा प्रेमियों से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। पिछले विधानसभाई चुनावों में डेरा के इस राजनीतिक प्रकोष्ठ का रूझान कांग्रेसी पक्षीय रहा था, जिसकी अकाली-भाजपा सरकार बनने पर चर्चाएं भी हुई थी और अकाली दिग्गजों को शिकायत भी रही थी कि मालवा क्षेत्र में डेरा के इस राजनीतिक प्रकोष्ठ ने अकाली दल को राजनीतिक घाव दिए थे, जिन्हें अब तक कई अकाली दिग्गज सहरा रहे है। सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक प्रकोष्ठ की सात सदस्यीय कमेटी सक्रिय हो गई है और डेरा प्रेमियों से संपर्क बनाने में जुट गई है। डेरा प्रेमियों को सात सदस्यीय कमेट निर्णय की प्रतीक्षा करने को कह रही है और संकेत दे रही है कि राजनीतिक प्रकोष्ठ के निर्णय पर अमलीजामा पहनाने के लिए तैयार रहें। सूत्रों के मुताबिक भविष्य में होने  जा रहे पंजाब विधानसभाई चुनावों में डेरा का राजनीतिक प्रकोष्ठ एक तरफा समर्थन की बजाए विभिन्न विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की सहायता करने की संभावना है।

सफलता के लिए बॉडी लैंग्‍वेज पर ध्यान दें

सक्‍सेस केवल अच्‍छी नॉलेज रखने या स्‍कि‍ल्‍स पाने में नहीं है। आप तब तक सक्‍सेस नहीं पा सकते जब तक आपका खुद को एक्‍सप्रेस करने का तरीका सही नहीं है। 

प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल लाइफ इंपॉर्टेंट यह नहीं है कि आप क्या कहते हैं, बल्कि यह ज्‍यादा इंपॉर्टेंट है कि आप उसे किस तरह कहते हैं? हमेशा मुस्कराते रहें। जो लोग अपने बारे में अच्छा सोचते हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज अक्सर बेहतर होती है।

सार्वजनि‍क जीवन जीने वालों के लि‍ए ही नहीं बल्‍कि‍ दफ्तर में काम करने वालों के लि‍ए भी 'एटि‍ट्यूड' बड़ी काम की चीज है। इसलि‍ए जब भी आप कि‍सी से बात करें तो बॉडी लैंग्‍वेज पर जरूर ध्‍यान दें। 

कुछ खास बातें : 

चाहे बॉस हो या कलीग हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें करें।

खुली हथेलियां गंभीरता और ग्राह्यता को दर्शाती हैं।

करीब रहकर बात करना यानी रुचि लेना और दूर होने का मतलब है बातचीत में ध्यान नहीं होना।

आराम मुद्रा का मतलब है कि आप संवाद के लिए तैयार हैं। 

ऑफिस में हाथ बांधकर खड़ा नहीं होना चाहिए, यह विरोध का संकेत है। 

हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं। 

मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा है।

ऑफिस में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपनी पर्सनालि‍टी की सीरि‍यसनेस खो देंगे।