Monday, 9 January 2012

सावधान! दिल्ली के पेट्रोल पंपों की फिजा में है कैंसर

 अगर आप दिल्ली में किसी भी पेट्रोल पंप से अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाते तो हैं तो सावधान हो जाइए। इन पेट्रोल पंपों के कैंपस में बहने वाली हवा जहरीली है और जब आप इस हवा में सांस लेते हैं तो आपके शरीर में तमाम प्रदूषित कणों के साथ कैंसर पैदा करने वाले कुछ तत्व भी पहुंचते हैं। 

दिल्ली के 40 पेट्रोल पंप्स पर स्टडी करने के बाद द एनर्जी ऐंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट ( TERI ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। अंग्रेजी टैब्लॉइड 'मेल टुडे' टेरी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है, दिल्ली में मौजूद पेट्रोल पंप्स के कैंपस में हवा की क्वालिटी खतरनाक स्तर तक खराब है और इसमें ऐसे जीवाणु मौजूद हैं जो आगे चल कर कैंसर की वजह बनते हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा न सिर्फ प्रदूषित है ब्लकि इसमें बेंजीन, टॉल्यून और ज़ाइलेन जैसे जहरीले यौगिक मौजूद हैं। इनकी मात्रा परमिसिबल लिमिट से हजार गुणा ज्यादा है। 

वे सभी लोग जो इन पेट्रोल पंप पर आते हैं, उनमें ये कैंसरकारी तत्व सांस के जरिए प्रवेश करते ही हैं। ऐसे में जो लोग (कर्मचारी आदि) वहां 10 से 12 घंटे का समय बिताते हैं, उनके लिए इनकी चपेट में आने का खतरा बहुत ज्यादा है। 

टेरी ने हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंपों पर यह स्टडी की है। इन कंपनियों के पेट्रोल पंप पूरी दिल्ली में फैले हैं। इस स्टडी में शामिल रहीं रिसर्चर मीना सहगल ने इस बारे में बताया, 'जब भी अपनी गाड़ी की टंकी में पेट्रोल डलवाता है, ये खतरनाक तत्व वातावरण में फैल जाते हैं।' 

जो पेट्रोल पंप भीड़भाड़ इलाकों में हैं, वहां इसकी चपेट में ज्यादा से ज्यादा लोग आते हैं। एम्स के रेडियोथेरपी विभाग के सीनियर प्रफेसर डॉक्टर पी. के. झुलका ने डेली मेल से कहा कि जो भी इन पेट्रोल पंप पर जाता है, वह इन विषैले तत्वों की चपेट में आता है। सरकार को इन खतरनाक तत्वों को लीक होने से रोकने के उपाय करने चाहिए। 

वैसे, भारत में फिलहाल पेट्रोल पंप कैंपस में हवा की स्वच्छता को लेकरर कोई मानक तय नहीं किए गए हैं। हालांकि, पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कर्मियों को मास्क दिए जाते हैं, लेकिन इन्हें पहने हुए उन्हें कम ही देखा गया है। 

अखबार में छपी खबर के मुताबिक, इन जगहों पर मौजूद टॉक्सिक कणों के हानिकारक प्रभाव को वेपोर रिकवरी सिस्टम इंस्टॉल करके कम किया जा सकता है जैसा कि विदेशों में किया जाता है। ये सिस्टम दिल्ली के कई पेट्रोल पंप पर देख गए लेकिन इन्हें लागू करना अनिवार्य नहीं है और इसलिए इनका प्रयोग बमुश्किल ही किया जाता है। ऑयल कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार, ऑयल कंपनी को इस समस्या का पता है और वेपोर रिकवरी सिस्टम के बारे में वह डेमो देती भी हैं लेकिन यदि इसके उपयोग को लेकर कोई नियामक हो तो हम इसके संबंध में उचित कदम उठा सकते हैं। 

आईओसी के प्रवक्ता ने डेली मेल से कहा कि टेरी की रिपोर्ट के बल पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता जब तक कि हम खुद यह नहीं देख लेते। 

टेरी ने गर्मियों और सर्दियों दोनों ही मौसम में प्रतिदिन 8 घंटे पेट्रोल पंप पर ऑब्जर्वेशन किया है। ये जहरीले तत्व गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में अधिक गहन पाए गए।

एम्स के एंट्रेंस में धरा गया मुन्नाभाई एमबीबीएस

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एम्स की प्रतिष्ठित ऑल इंडिया पोस्ट ग्रैजुएट एंट्रेंस एग्जाम में मुन्नाभाइयों के मैनेजमेंट का भंडाफोड़ हुआ है। रविवार को एम्स अपने और देश भर के अन्य मेडिकल कॉलेजों के लिए एंट्रेंस टेस्ट करवा रहा था। एग्जाम शुरू होने के बाद एक सूचना पर स्पेशल ऑपरेशन स्क्वॉड (एसओएस) ने नोएडा में रेड की तो क्राइम ब्रांच की यह टीम भी हैरत में पड़ गई। इस हाईटेक कंट्रोल रूम से एग्जाम सेंटर में हर सवाल का जवाब पहुंचाया जा रहा था। कंट्रोल रूम में बैठे एक एमबीबीएस स्टूडेंट और एक चैनल के प्रोग्रामर को और एग्जाम सेंटर में बैठे एक एमबीबीएस डॉक्टर और दो एमबीए गिरफ्तार कर लिए गए हैं। 

एग्जाम पास करवाने के लिए 20-20 लाख रुपये में सौदा किया गया था। डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अशोक चांद ने बताया कि अडिशनल डीसीपी संजय भाटिया के नेतृत्व में एसीपी कृष्ण कुमार और इंस्पेक्टर राजेश की टीम को इस सिंडिकेट की सूचना मिली थी। इसके बाद एसआई देवेंद्र, कॉन्स्टेबल राजा राम, सुशील और जसविंदर की टीम ने रेड की। जेवर के रहने वाले दो एमबीए कृष्ण प्रताप और कपिल कुमार मेडिकल फील्ड से नहीं होने के बावजूद एग्जाम देने आए थे। इन दोनों ने टेस्ट के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर एडमिट कार्ड भी हासिल किया। 

पेपर मिलते ही दोनों ने मोबाइल के कैमरे से पेपर के हर पेज का फोटो खींच कर कंट्रोल रूम पर ईमेल कर दिया। ऐसा करने में एक के सफल नहीं भी रहने पर दूसरे की व्यवस्था की गई थी। कंट्रोल रूम पर पेपर का प्रिंट लेने के लिए कंप्यूटर, स्कैनर और प्रिंटर की व्यवस्था की गई थी। इतना ही नहीं लाइट चले जाने की स्थिति में इनवर्टर तक लगवाया गया था। वहां उज्जैन से आया एमबीबीएस सेकेंड ईयर का स्टूडेंट मोहित और एक धार्मिक चैनल में प्रोग्रामर भीष्म सिंह पेपर सॉल्व कर एग्जाम सेंटर में बता रहे थे। वहां पर एक और एमबीबीएस फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट मौजूद था, जो मौके से फरार हो गया। 

एग्जाम सेंटर में पेपर दे रहे एमबीबीएस की शर्ट की कॉलर में ब्लूटूथ का ट्रांस्मीटर सिलवाया गया था, जबकि कान में ईयर प्लग की सिर्फ चिप ही लगाई गई थी। ताकि किसी को दिखाई न दे। इन सभी को मोबाइल बेल्ट से ऊपर ही रखने के लिए कहा गया था, ताकि सिग्नल में प्रॉब्लम न हो। अब तक की जांच में आधा दर्जन एमबीबीए के इस तरह से एग्जाम देने का खुलासा हो चुका है। इस केस में अब तक दो एमबीए, एक एमबीबीएस डॉक्टर, एक एमबीबीएस के स्टूडेंट और चैनल प्रोग्रामर को गिरफ्तार कर लिया गया है। जल्द ही और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। एक साथ कई जगह पर क्राइम ब्रांच रेड कर रही है।

प्रेरणादायक टेप सुनते थे माइकल जैक्सन

अभिनेत्री जेनी फोंडा का कहना है कि दिवंगत पॉप सम्राट माइकल जैक्सन प्रेरणा और उत्साह के लिए टेप सुना करते थे। जेनी 1981 में करीब दो सप्ताह तक जैक्सन के साथ रही थीं। फीमेल फर्स्ट के मुताबिक जेनी ने जैक्सन के साथ अपने कुछ दिनों के प्रवास के दौरान पाया था कि पॉप दिग्गज कई टेप सुना करते थे, जिनमें उन्हें अच्छे इंसान होने की प्रेरणा मिलती थी। जेनी ने कहा कि माइकल जैक्सन के साथ मैं 10 दिनों तक रही। वह अपने तकिए के पास एक टेप रिकॉर्डर रखते थे। वह इस टेप को सुना करते थे। इस टेप से आवाज आती थी आप अच्छे इंसान हैं, आगे बेहतर होगा।

आमिर खान : सितारे से सूरज बनता अभिनेता

80 का दशक फिल्म उद्योग के लिए बेहद उलट-पुलट का दौर माना जाता है। ये दौर पुराने सितारों के क्षीण होने और नए सितारों के जन्मने का दौर था। 1988 का साल बॉलीवुड के लिए सदमे से कम नहीं था। अमिताभ बच्चन, सन्नी देओल, मिथुन चक्रवर्ती, विनोद खन्ना समेत कई सितारे जमीन पर आ गिरे। इन सितारों की फीकी चमक में एक नए सितारे ने जन्म लिया। 

मार्च 1988 को प्रदर्शित हुई कयामत से कयामत तक ने फिल्म उद्योग को आमिर खान के रूप में ऐसा सितारा दिया, जिसकी चमक आज तक बरकरार है। हाल ही में उन्हें यूनिसेफ ने भारत में ब्रांड एंबेसेडर बनाकर नई जिम्मेदारी सौंपी है। सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित आमिर भारतीय बच्चों की बेहतरी के लिए रचनात्मक पहल करने जा रहे हैं। आज ये सितारा सूरज बनने की राह पर है, शिखर पर विराजमान आमिर अब बादलों को चीर कर आगे बढ़ जाना चाहते हैं। 

टैलेंट बिल्डर आमिर 
आमिर ने अपने प्रोडक्शन में नए युवाओं को मौका दिया है। जाने तू या जाने ना में इमरान खान और प्रतीक बब्बर को एंट्री दी। उनके प्रोडक्शन की डेली बेली, पीपली लाइव में भी नए चेहरे ही नजर आते हैं। डेली बेली के रायटर अक्षत वर्मा भी आमिर की ही खोज हैं। आमिर अब जैकी श्राफ के बेटे टाइगर को अपनी फिल्म में मौका देना चाहते हैं। टाइगर में वे एक बेहतरीन एक्शन हीरो की छवि देखते हैं।

आमिर की फ्रेंडशिप 
आमिर और सचिन तेंडुलकर की दोस्ती लगभग बीस साल पुरानी है। 22 साल पहले आमिर ने सचिन को मुंबई के ब्रेब्रोन स्टेडियम में प्रैक्टिस करते देखा था। तब उन्होंने कपिल देव से पूछा कि यह कौन है। कपिल ने बताया यह तुम्हारे शहर का ही है। आमिर को नहीं मालूम था कि सचिन भी उनके बहुत बड़े फैन हैं। बाद में दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी और अब ये हाल है कि आमिर सचिन के पुणे में स्थित बंगले के पास कोई घर तलाश कर रहे हैं।

सोशल सर्विस में अव्वल नंबर 
* ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमले के खिलाफ आवाज उठाई।

* यूनिसेफ की ओर से वे भारत में बच्चों के पोषण और बेहतरी के लिए जागरूकता फैलाएंगे। 

* नर्मदा बचाओ आंदोलन में मेधा पाटकर का साथ दिया। 

* अन्ना के लोकपाल बिल के लिए आवाज उठाई। प्रधानमंत्री को पत्र लिख लोकपाल बिल लागू करने के लिए कहा। 

* उनका परिवार बेसहारा पशुओं की देखभाल का जिम्मा भी उठाता है। वे पेटा के अभियानों में भी मदद करते हैं। 

* केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के कैंपेन से जुड़े उनके अतिथि देवो भवः के विज्ञापन काफी सराहे गए।

* शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए भी आमिर ने काफी काम किया है।

* भारत में विश्वकप मैचों के दौरान वे तिरंगा लिए भारतीय टीम के हर मैच में उत्साह बढ़ाते दिखे। 

* अब सुपरस्टार रजनीकांत के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय के विज्ञापन में बच्चों को सेहतमंद रहने के नुस्खे बताते नजर आने वाले हैं।

फ्यूचर प्रोजेक्ट 
* रीमा कागटी की सस्पेंस थ्रिलर तलाश 1 जून 2012 को प्रदर्शित होगी। उनके साथ करीना कपूर और रानी मुखर्जी दिखाई देंगी। 

* यशराज प्रोडक्शंस की धूम-3, 2013 में प्रदर्शित होगी। इसके लिए आमिर ने लंबी तैयारी की है। सुनने में आया है कि आमिर का कैरेक्टर लार्जर देन लाइफ है।

* ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर दानिज तेनकोविक ने आमिर को अपनी फिल्म में एक रोल की पेशकश की है। दानिज वही डायरेक्टर हैं, जिनकी फिल्म नो मेंस लैंड ने 2002 के ऑस्कर में आमिर की लगान को पछाड़ दिया था। 

* एकता कपूर ने विख्यात मिल्कमैन कुरियन वर्गीज पर बायोपिक बनाने के लिए तिग्मांशु धूलिया को साइन किया है। तिग्मांशु ने मुख्य रोल के लिए आमिर को ऑफर किया है। हालांकि अभी आमिर ने इसके लिए हाँ नहीं कही है लेकिन उन्हें मनाने के प्रयास जारी हैं। 

आमिर स्पीक 

* मैं नहीं चाहता कि मेरा मोम का पुतला मैडम तुसाद म्यूजियम में लगाया जाए। मेरे प्रशंसक मुझे फिल्मों में देख लेते हैं, इतना ही बहुत है।

*मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट महाभारत है। लेकिन इसके लिए मुझे बीस साल तैयारी करनी होगी, तब कही फिल्म बना सकूंगा।

*फिल्मों में सिगरेट के कश पर पाबंदी कलाकारों की रचनात्मकता पर हमला है।

अक्षय कुमार हैं रियल 'खिलाड़ी'

'खिलाड़ी कुमार' से मशहूर बॉलीवुड अभिनेता 'अक्षय कुमार' आज कई युवाओं की पसंद बन चुके हैं। फिल्मों में किए गए उनके स्टंट और उनके आकर्षक व्यक्तित्व से प्रभावित युवा उन्हीं की तरह बनने के सपने देखते हैं। अक्षय आज जिस मुकाम पर हैं उसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ अक्षय की मेहनत को दिया जाना गलत नहीं होगा, क्योंकि न वे स्टार पुत्र हैं, न उनके परिवार का फिल्म जगत से कोई संबंध और न ही कोई गॉडफादर जो उन्हें लांच करता। यह सफलता अक्षय को सिर्फ अपनी मेहनत के बलबूते प्राप्त हुई है। 
प्रभावी डील-डौल के धनी अक्षय का जन्म 9 सितम्बर 1967 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ। अक्षय के पिता एक सरकारी कर्मचारी थे। अक्षय का असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। कम उम्र में ही अक्षय एक परफॉर्मर के रूप में पहचाने जाने लगे, खासतौर पर एक डांसर के रूप में। अक्षय ने अपनी स्कूली पढ़ाई डॉन बॉस्को स्कूल से और आगे की पढ़ाई गुरुनानक खालसा कॉलेज से की।

भारत में टीकवॉन्डो में ब्लैक बेल्ट हासिल करने के बाद अक्षय ने बैंकॉक में मार्शल आर्ट्स की पढ़ाई की और वहां वेटर और शेफ के रूप में काम भी किया। बैंकॉक से लौटने के बाद अक्षय ने मुंबई में मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देना शुरू किया। उनके एक स्टूडेंट जो पेशे से फोटोग्राफर था उसी ने अक्षय को मॉडलिंग करने की सलाह दी और साथ ही एक कंपनी के लिए मॉडलिंग असाइनमेंट भी दिया। मॉडलिंग के कुछ ही महिनों बाद अक्षय को फिल्म दीदार के लिए निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती द्वारा मुख्य भूमिका का अवसर मिला।

अक्षय ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1991 में 'सौगंध' से की। हालांकि उनकी यह फिल्म सफल साबित नहीं हुई। अक्षय की पहली हिट फिल्म 1992 में आई 'खिलाड़ी' है। खिलाड़ी और खिलाड़ी सीरीज की फिल्मों ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक्शन हीरों के रूप में स्थापित कर दिया। एक्शन फिल्मों में खासतौर पर अक्षय को लिए जाने का प्रमुख कारण उनकी अच्छी कद-काठी, मार्शल आर्ट्स का ज्ञान और खतरनाक स्टंट करने की क्षमता है। फिल्मों में खुद पर फिल्माए जाने वाले खतरनाक से खतरनाक स्टंट अक्षय आप ही करते हैं। वे इसके लिए किसी डुप्ल‍ीकेट का इस्तेमाल नहीं करते। 

एक्शन रोल के साथ ही अक्षय रोमेंटिक, नकारात्मक, ड्रामेटिक और कॉमेडी रोल भी बखूबी निभा सकते हैं। 2000 के दशक में उन्होंने कई कॉमेडी फिल्में कर दर्शकों को खूब हंसाया और अपनी कॉमेडी से उन्हें अचंभित भी किया। फिल्म दर फिल्म उनकी मेहनत से उनका अभिनय निखरता चला गया। फिल्म 'अजनबी' के लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ विलेन' और फिल्म 'गरम मसाला' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ कॉमिक परफॉर्मर' के 'फिल्म फेयर' अवॉर्ड्स से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें 'पद्मश्री' और 'राजीव गांधी' अवॉर्ड्स से भी नवाजा जा चुका है।

अब तक 100 ‍से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके अक्षय का 2012 में भी बोलबाला रहने वाला है। इस वर्ष अक्षय की पांच फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। इन फिल्मों में से एक फिल्म रॉडी राठौर में अक्षय फिर एक्शन करते दिखाई देंगे।

अक्षय के इस नेम-फेम, सफलता और जबर्दस्त फैन फॉलोइंग का कारण अक्षय की मेहन‍त, लगन और धैर्य है। उनके इसी गुण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई है। उनकी डेयरिंग पर्सनेलिटी ने युवाओं को उनका कायल बना दिया है।

Sunday, 8 January 2012

विज्ञापनी पत्रकारिता के बीच


विज्ञापन के दौर में आ गई पत्रकारिता के लिए यह साल बहुत रोचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। इंदिंरा के बाद कौन, राजीव के बाद जैसे सवालों से भारतीय जनता का सामना हमेशा हुआ। अब अन्ना के बाद कौन। अन्ना के जिस ब्रांड के भरोसे मीडिया का बाजार गुलाबी हुआ, वह बहुत ही जल्द फीका भी पड़ गया। मुद्दे उठे, लाइव रिपोर्टिंग हुई, संसद तक में हंगामा भी पर फिर सब कुछ पूरी तरह से ठस्स।
              
तो यह पत्रकारिता का एक नया चेहरा है। यहां व्यक्ति विशेष या मुद्दा विशेष एकाएक परम जरूरी हो जाता है और फिर एकाएक गायब। पर न्यूज से विज्ञापन गायब नहीं होते। वे अलग-अलग तरीकों से कायम रहते हैं।
 
एक न्यूज चैनल पर हाल ही एंकर जिस लैपटाप का इस्तेमाल कर रहे थे, उस पर मसाले की एक कंपनी का विज्ञापन बचकाने तरीके से चिपक था। कुछ यूं कि विज्ञापन बड़ा और लैपटाप छोटा दिख रहा था। यह सीधा विज्ञापन है। लैपटाप इस कंपनी से मुफ्त मिला है सो हम उसे प्रचारित कर रहे हैं । यह हास्यास्पद है पर बहुत खतरनाक नहीं पर दूसरे विज्ञापन तुरंत जनता की पकड़ में नहीं आते। वारदात में यह बताया जाना कि कैसे शाहरूख खान की फिल्म के आने से पहले पाइरेसी का बाजार चल निकला है और कितने करोड़ का कारोबार करने वाला है, महज खबर नहीं है और महज अपराध नहीं है। यह एक प्रचार है। फिल्मी सितारों का बड़े परे की बजाय छोटे परदे पर ज्यादा समय बिताते हुए बार-बार यह बताना कि किस फिल्म के शूट के दौरान क्या-क्या हुआ भी कोई खबर नहीं है।
 
तो इस साल खबर की दुनिया को गैर-जरूरी प्रचारों से जूझने के बारे में सोचना होगा। जनता फिलहाल नासमझ है पर उसकी नासमझी का थर्मामीटर छ महीने बाद भी यहीं पर टिका रहेगा, यह कतई जरूरी नहीं। कैमरों को अब समाज की तरफ मुड़ने की कोई रणनीति बनानी होगी। जहां पैसा भी आए पर साथ ही मीडिया के मीडिया होने की शर्तें भी पूरी हों। यह जनता है और जनता आखिरकार सब कुछ जानती भी है।  

सिरसा में भाई कन्हिया ट्रस्ट द्वारा बनाये गया (मंदबुधि व बेसहारा ओरतो का) आश्रम का उद्घाटन समारोह


सिरसा 9 जनवरी - सिरसा के भाई कन्हैया ट्रस्ट का छठा वार्षिक समारोह व भाई कन्हैया आश्रम (मनंबुद्वि व बेसाहारा औरतो व बच्चो )का शुभांरभ बड़ी हर्षोल्लास से किया गया कार्यक्रम में मुख्यतिथि के तौर पर आल इंडिया पिंगलवाडा सोसायटी की चेयरपर्सन डा. बीबी इन्द्रजीत कौर ने बतौर मुख्याातिथि शिरकत की वही अतिरिक्त उपायुक्त डी. के बेहरा व पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र यादव ने विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। साथ ही शहरी ब्लाक प्रधान भूपेश मैहता, जिला इनेलो प्रधान पदम जैन, नगर पार्षद रमेश मेहता, अनिल बांगा, हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष बलजीत सिंह, स. सुरेन्द्र सिंह बैदवाला, सुरेश कुक्कू सहित अनेको समाजिक संस्था के सदस्य व अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
 समारोह का आगाज दीप प्रवज्जजित करके किया गया । इस अवसर पर ट्रस्ट के सदस्य भूप सोनी ने ट्रस्ट द्वारा करवाए जा रहे मानवता भलाई के कार्यो के बारे में सभी को बताया व आए हुए अतिथियो का स्वागत किया भूप सिंह ने बताया की इस आश्रम में बेसाहरा व मनंबुद्वि महिलाओं व बच्चों को आसरा दिया जाता है और जब वे ठीक होती है तो उनके घर का पता करके उन्हे उनके घर भेज दिया जाता है वही सदस्यो ने बताया की इसके अलावा ट्रस्ट सिविल हास्पीटल में दाखिल मरीजो को दूध, भोजन व फल की सेवा देती है । भाई कन्हैया आश्रम के प्रधान गुरविन्द्र सिंह ने बताया की ट्रस्ट के सदस्य हमेशा मानवता भलाई के कार्यो में आगे रहते है और उनकी संस्था की चार एंबुलैंस पिछले 4 सालो को अपनी नि:शुल्क सेवा दे रही है यहां तक की हर तीसरे महीन रक्तदान कैंप भी लगाया जाता है जिसमें की काफी संख्या में लोग रक्तदान करते है
        मुख्यातिथि के तौर पहुंची आल इंडिया पिंगलवाडा सोसायटी की चेयरपर्सन डा. बीबी इन्द्रजीत कौर ने बताया की उनके आश्रम भी इस तरह की अनेको बेसाहारा औरते है लेकिन समाज के लोगो को कलंक बताते हुए उन्होने कहा की आज के मां बाप अपने बच्चो के बारे में इतना सोचते पर बेटे उन्हे घर से निकालकर उन्हे बेसाहरा बना देते हैै। यहां तक की 9 महीने पेट में रखकर पालने वाली मां को भी मिन्टो में घर से बाहर निकाल देते है क्या इसी लिए मां अपने बच्चे को पालपोस कर बडा करती है साथ ही बीबी इन्द्रजीत कौर ने लोगो को समाज में फैल रही बुराइयो से भी अवगत करवाया और लोगो से आवहान किया की वे बुराई छोड अच्छाई की और चले साथ ही डा. इन्द्रजीत कौर ने गुरू नानक देव जी जीवनी के बारे में भी लोगो को बताया ।

        इस मौके पर कार्यक्रम में आए संस्था के सदस्यो व गणमान्य लोगो को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया । कार्यक्रम में आश्रम के सेवादार रंजीव गर्ग , ऋषिपाल जिंदल, हरबंस लाल जिंदल, भूप सिंह सोनी, बलराज सिंह बाजवा, हरदेव सिंह ध्ंाजल, मा. नछत्र सिंह, गुरशरण कालडा, राजेश बजाज, मल्लसिंह पटवारी, संजय सिंगला, संजीव जैन एडवोकेट, मेंघनाथ शर्मा, अर्जुन शर्मा, अवनीश कालडा, कृष्ण सिंगला, गुरमीत सिंह उपस्थित रहे।