Tuesday, 10 January 2012

लोहड़ी का त्यौहार बड़े ही उत्साह से मनाया



 लोहड़ी का त्यौहार पुरे उत्तर भारत में १३ जनवरी को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है,लेकिन सिरसा की महिलाओ की समिति ने लोहड़ी के इस त्यौहार को  सिरसा में अपने ही  अंदाज़ से मनाया.लोहरी के इस कार्यक्रम में महिलाओं के साथ साथ बच्चो ने भी खूब मज़ा लिया.









 लोहड़ी का त्यौहार पुरे उत्तर भारत में १३ जनवरी को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है,लेकिन सिरसा की महिलाओ की समिति ने लोहड़ी के इस त्यौहार को  सिरसा में अपने ही  अंदाज़ से मनाया.लोहरी के इस कार्यक्रम में महिलाओं के साथ साथ बच्चो ने भी खूब मज़ा लिया.



                                 लोहड़ी के इस कार्यक्रम का आयोजन सिरसा की महिला समिति द्वारा किया गया जिसमे काफी संख्या में महिलाओं और बच्चो ने हिस्सा लिया .इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चो के मनोरंजन के लिए कई गेमो का आयोजन भी किया गया.गेमो में तम्बोला,म्यूजिकल चेयर,व् कई रोमांचक गेमो को शामिल किया गया.कार्यक्रम में महिलाए पंजाबी गीतों की धुनों पर खूब नाची वही गेमो में विजेता रहने वालो को पुरूस्कार स्वरुप उपहार भी दिए गए.

Monday, 9 January 2012

‘फैमिली गेट टू गैदर

हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ·ी ओर से 14 जनवरी, शनिवार ·ो सुरखाब पर्यटन स्थल, सिरसा में लोहड़ी एवं म·र स·्रांति ·े उपलक्ष्य में ‘फैमिली गेट टू गैदर’ ·ार्य·्रम आयोजित ·िया जाएगा। इस अवसर पर पत्र·ारों ·े अलावा शहर ·ी जानी मानी हस्तियां अपने परिवार सहित शिर·त ·रेंगी। यह जान·ारी देते हुए यूनियन ·े जिलाध्यक्ष अरुण भारद्वाज व जिला महासचिव धीरज बजाज ने बताया ·ि यह ·ार्य·्रम आपसी भाईचारे ·ो बढ़ावा देने व तनाव ग्रस्त माहौल ·ो मिटाने ·े लिए ·िया जा रहा है। उन्होंने बताया ·ि इस समारोह ·ा मुख्य म·सद जहां पत्र·ारों ·े परिवारों ·ो आपस में रू-ब-रू ·रवाना है वहीं समारोह ·े दौरान उनमे छिपी प्रतिभा ·ो भी ए· मंच प्रदान ·रना है। उन्होंने बताया ·ि यूनियन ·ी और से हमेशा ऐसे ·ार्य·्रम आयोजित ·िए जाते है। उन्होंने बताया ·ि इस मौ·े पर पारिवारि· माहौल में क्विज प्रतियोगिताएं व अन्य रोच· जैसे तंबोला, म्यूजि·ल चेयर आदि होंगे। वहीं इस ·ार्य·्रम में पंजाबी सभ्याचार· मेला, मशहूर ·ला·ार संजीव शाद व पंजाबी संगीत·ार रविंद्र नूर अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे।

सिरसा में एनएसएस ·7 सात दिवसीय शिविर

सिरसा, -राज·ीय माडल संस्·ृति वरिष्ठ माध्यमि· विद्यालय सिरसा में एनएसएस ·े सात दिवसीय शिविर ·े तीसरे दिन एनएसएस यूनिट ए· व दो ·े स्वयं सेव·ों ने  ईश्वर स्तुति ·े साथ शुरूआत ·ी। 12 वीं ·े छात्र संदीप ने सभी स्वयं सेव·ों ·ी तरफ से विश्व शांति ·ी प्रार्थना ·ी तथा इस·े बाद गूंजे गगन में, मह·े पवन में सदभावना  नाम· गीत प्रस्तुत ·िया। विद्यालयों में पौधारोपण ·ा ·ार्य ·िया गया तथा पौधों ·ी देखभाल ·े लिए विशेष सफाई अभियान चलाया गया। विद्यालय ·े प्राचार्य नरेश सिंगला ने ·हा ·ि स्वच्छ वातावरण व शुद्ध  पर्यावरण ही मनुष्य ·े अस्तित्व ·ो बचा स·ता है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पेड पौधों ·ो लगाना चाहिए और उन·ी रक्षा ·रनी चाहिए। भोजन उपरांत स्वयं सेव·ों ने विद्यालय ·ैंपस ने पानी ·ी टं·ी ·ो साफ ·िया। शिविर  प्रभारी अरविंद शर्मा व देवेंद्र शर्मा ने स्वयं सेव·ों जल संरक्षण ·ा सं·ल्प दिलाया। शिविर में विशेष जान·ारी देने ·ी ·डी में सुनील ·ुमार प्रवक्ता राजनीति शास्त्र ने स्वयं सेव·ों ·ो मौलि· अधि·ारों ·ा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपयोग विषय पर जान·ारी दी। इस अवसर पर महेंद्र मेहता, ओपी सचदेवा, दर्शन शर्मा व अन्य अध्याप· भी मौजूद थे।

दुनिया खत्म होने की आशंका के बीच मनाया नववर्ष 2012 में दुनिया खत्म हो जाने की आशंका


विश्व भर के अवाम ने पर्थ से लेकर वॉशिंगटन तक अलग-अलग समय पर अपने अपने अंदाज में बाहें फैलाकर जश्न मनाकर 2012 के उस वर्ष का स्वागत किया जिसमें दुनिया के खत्म हो जाने की आशंकाएं लंबे वक्त से की जाती रही हैं।

पृथ्वी के सुदूर पूर्व में स्थित देशों ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण प्रशांत में पड़ने वाले टापू देशों ने वर्ष 2012 का सबसे पहले स्वागत किया। जैसे-जैसे रात की खामोशी के बीच वक्त सरकर पश्चिम के देशों की ओर बढ़ रहा था वैसे-वैसे आसमान में रंगीन आतिशबाजी से उसका स्वागत किया गया। विश्व के 2012 में खत्म हो जाने की आशंकाएं पुराने समय से आस्तित्व में रही हैं।

माया सभ्यता के अनुसार 21 दिसंबर 2012 को पूरा विश्व एक जलजले में खत्म हो जाएगा। माया सभ्यता में मान्यता थी कि दुनिया 5125 वर्ष पुरानी है और 21 दिसंबर को कुछ ऐसा बड़ा होगा जो इस दुनिया के अंत का सबब बनेगा। लातिन भविष्यवक्ता नास्त्रेदामस ने भी 500 वर्ष पहले कुछ ऐसी ही भविष्यवाणी की थी। हालांकि ऐसा लग रहा था कि दुनिया के खत्म होने की आशंकाओं के बीच लोग जिंदगी का जश्न मना लेना चाहते हों।

ND
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर पर जहां बादलों का आकार लिए हुए आतिशबाजी और उसके बीच में सिडनी ब्रिज को इंद्रधनुष जैसा जगमगा कर नववर्ष का जश्न मनाया गया, वहीं भयंकर राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में चल रही रूस की राजधानी मास्को के आसमान पर सुर्ख आतिशबाजी ने जगह ली। 

अमेरिका में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कावयर पर भी हजारों लोग बीते वर्ष को विदाई देने के लिए जमा हुए थे। कई न्यूयॉर्क वासी शनिवार सुबह से ही पार्टी में पहनी जाने वाली टोपियां और 2012 के चश्मे लगाकर घूमते देखे गए थे।

न्यूयार्क का मौसम भी आम दिनों के मुकाबले काफी खुशनुमा और गर्म था। चीन की संवाद एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि नववर्ष के अवसर पर एक बड़ी संख्या में इंटरनेट उपभोक्ताओं ने इंटरनेट की मदद से दुनिया के अंत जैसे विषयों पर सर्च किया। 

हालांकि दुनिया के खत्म होने की इस अटकलबाजी के बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने इस बारे में लोगों का भय दूर करते हुए कहा कि दुनिया को 2012 में कुछ भी नहीं होने जा रहा है।

आपके दिमाग में ही फेसबुक

यह बात सुनने में आपको अजीब लग सकती है लेकिन आपके दिमाग में फेसबुक जैसा कुछ तत्व है जो आपके सोशल नेटवर्क को संचालित करता है।

एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क में बादाम के आकार का एक ऐसा प्रमस्तिष्कखंड होता है जो यह तय करता है कि व्यक्ति कितने दोस्त बना सकता है। यह खंड जितना बड़ा होगा व्यक्ति के दोस्तों का नेटवर्क उतना ही बड़ा होगा।

एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 19 से 83 वर्ष के लोगों से प्रश्नावली के माध्यम से पूछा कि उसके कितने दोस्त हैं या कितने समूह से वह संबद्ध है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक एमआरआईजी से बड़े प्रमस्तिष्कखंड और अधिक दोस्तों वाली जिंदगी के बीच सकारात्मक संपर्क पाया गया है।

मुख्य शोधकर्ता बॉस्टन के नोर्थ इस्टर्न विश्वविद्यालय के मनोविज्ञानी प्रो. लीजा बैरेट ने कहा कि ये निष्कर्ष सोशल ब्रेन थ्योरी के अनुरूप है जो यह कहता है कि मानव प्रतिस्कष्कखंड बढ़ते जटिल सामाजिक विश्व से निबटने के लिए विकसित हुआ है। 

मच्छरों को बेवकूफ बनाने की क्रीम

क्या आप जानते हैं कि मानव का सबसे पुराना दुश्मन कौन है? नहीं... तो देश के रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) से पूछिए। जी हाँ, मनुष्य के सबसे पुराने दुश्मन मच्छर के खिलाफ डीआरडीओ ने कमर कस ली है। मच्छरों को बेवकूफ बनाने के लिए कुछ क्रीम बनाई गई है। 

'मैक्सो मिलट्री', 'मैक्सो सेफ' और सॉफ्ट वाइप्स, डीआरडीओ ने ये क्रीम आधारित उत्पाद तैयार किए हैं। इनकी गंध लाजवाब है और दूसरे उत्पादों की तरह यह चमड़ी के रोम छिद्र भी बंद नहीं करेगी। डीआरडीओ के शोध व विकास के मुख्य नियंत्रक प्रहलाद ने कहा कि यह लगाने से मच्छरों को मानव गंध नहीं आएगी। साथ ही इसको लगाने से मच्छरों की समझने की शक्ति गड़बड़ा जाएगी, जिससे वे मानव को नहीं काटेंगे। 

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इस पर शोध व विकास डीआरडीओ ने किया है। इसको ज्योति लैब द्वारा बनाया और बेचा जाएगा। इसको रक्षा सेवा के अलावा बाहर बेचने का लाइसेंस भी मिला है। विशेष तकनीकी के जरिए अपनी तरह का पहला ऐसा क्रीम तैयार किया गया है। इसके लिए डीआरडीओ और फिक्की के बीच इसके व्यवसायीकरण का करार हुआ है। 

सैनिक घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए क्रीम तैयार की गई है। हमेशा इन सैनिकों को मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगु की आशंका रहती है। इसे डायइथाइल फिनाइल एसिटामाइड तकनीक के आधार पर तैयार किया है। इसमें काफी समय से काम चल रहा है और कई सुधार किए गए।

बुढ़ापे में झूठ बोलना आसान नहीं

युवा लोगों के मुकबाले बुजुर्ग लोगों के लिए झूठ बोलना मुश्किल भरा काम होता है और हां, वे झूठ जल्दी से पकड़ भी नहीं पाते। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

ओटागो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस बाबत अध्ययन किया। उन्होंने धोखे पर युवा और बुजुर्ग लोगों के कौशल को जांचा।

‘साइकोलॉजी एंड एजिंग’ मैग्जीन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन के लिए 60 लोगों को लिया गया। उन्हें विभिन्न मुद्दों पर 20 लोगों की वास्तविक राय और झूठी राय की वीडियो क्लिंपिंग दिखाई गई।

समूह में 10 की आयु तीस साल या उससे कम थी और 10 व्यक्तियों की आयु 60 साल या उससे ज्यादा थी। सब को दो-दो क्लिप दिखाए। एक सच बोलता और दूसरा झूठ बोलता।

अनुसंशान के अगुवा प्रो. जैमिन हल्बरस्टाड ने बताया कि अध्ययन में पाया गया कि जब बुजुर्ग लोगों ने झूठ बोला तो सभी के लिए उसे पकड़ना आसान रहा।

प्रो. हल्बरस्टेड ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि बुजुर्ग व्यक्तियों में सफलतापूर्वक झूठ बोल पाने के लिए जरूरी मानसिक क्षमता उम्र के साथ कम होती जाती हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि झूठ के लिए याददाश्त और सामाजिक समझ की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि अपने अध्ययन में हमनें यह भी पाया कि सच और झूठ के बीच भेद कर पाने में भी बुजुर्ग प्रतिभागी युवाओं की माफिक नहीं थे।

वैज्ञानिक ने कहा कि गलती पकड़ पाने में नाकाम रहने की बुजुर्गों को लेकर हुए हमारे अध्ययन और उनके बहुत लंबे समय तक बोलते रहने और मुद्दों से भटक जाने को फिर से अध्ययन की गई परिघटना में खराब प्रदर्शन से जुड़ा पाया गया।