Saturday, 14 January 2012

सिरसा लोहड़ी मेला





सिरसा कि जाट धर्मशाला में पंजाबी सत्कार सभा कि और से लोहड़ी पर एक रंगारंग प्रोग्राम रखा गया | इस प्रोग्राम में मुख्या अतिथि के तोर पर कामरेड स्वर्ण सिंह विर्क ने शिरकत करते हुए प्रस्तुति देने वाले बच्चो को सम्मानित किया | प्रोग्राम में काफी संख्या  में लोगो ने पहुँच कर इस का आनंद उठाया |


 लोहड़ी पर्व पर रखे गए इस प्रोग्राम में जहा बड़ो ने अपनी आवाज के जादू से लोगो को सम्मोहित किया वही छोटे छोटे बच्चो ने भी अपनी प्रस्तुति दे कर सभी की मन  मोह लिया  | प्रोग्राम में भांगड़ा पेश कर प्रतिभागियों ने सब की वाह वाही लुटी |

बाबा रामदेव के मुंह पर शख्‍स ने पोती कालिख

दिल्‍ली में बाबा रामदेव की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद एक शख्‍स ने उनके मुंह पर कालिख फेंक दी. बाबा के समर्थकों ने उस शख्‍स को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी.
शख्‍स को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर उसने बाबा रामदेव पर कालिख क्‍यों फेंकी.  आरोपी शख्‍स का नाम कामरान है और वह दिल्‍ली के जामिया नगर का रहने वाला है.
इस घटना के बाद भड़के रामदेव समर्थकों ने घटनास्‍थल पर राहुल गांधी हाय हाय के नारे भी लगाए. गौरतलब है कि बाबा काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव ने दिल्‍ली में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस का आयोजन किया था. इसी दौरान बटला हाउस और उससे जुड़े दिग्विजय सिंह के बयान पर बाबा से सवाल पूछा गया जिसके बाद इस शख्‍स ने बाबा रामदेव के मुंह पर कालिख फेंक दी.
बाबा के समर्थकों ने उस शख्‍स को इतना पीटा कि वो लहूलुहान हो गया. इस घटना के बाद बाबा रामदेव हक्‍के-बक्‍के रह गए. प्रत्‍यक्षदर्शियों ने बताया कि उस व्‍यक्ति के हाथ में एक वायरलेस भी और लग रहा था जैसे वो कोई पुलिस वाला है.
मुंह पर कालिख फेंके जाने की घटना के बाद बाबा रामदेव ने कहा है कि उन्‍होंने काले धन पर सरकार से जवाब मांगा था काली स्‍याही नहीं. उन्‍होंने कहा कि किसी के स्‍याही फेंक देने से किसी के चरित्र पर कोई असर नहीं होगा और हम अपनी लड़ाई पूरी दृढ़ता से जारी रखेंगे. बाबा ने कहा कि जिन्‍होंने सच की लड़ाई लड़ी है उन्‍हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी और जालिम की प्रचृत्ति ही है जुल्‍म करना.

Thursday, 12 January 2012

गुरुमंत्र : ऐसे मनवाएं अपनी बात...

लोगों को अपनी समझ से अवगत कराने और उन्हें अपनी बात से सहमत कराने का गुण सफलता प्राप्त करने का एक मूल मंत्र है। किसी को अपनी बात से राजी करने और उसे परेशान करने में एक बारीक सा फर्क है। लोगों को अपने विचार समझा पाना वाकई एक ‍कठिन काम है। इसमें आपकी जरा सी एक चूक उस व्यक्ति को परेशान कर सकती है और वह आप पर झुंझला सकता है। नीचे लिखे कुछ आसान से टिप्स अपनाकर आप आसानी से लोगों को अपनी बात से सहमत कर सकते हैं। 

1. पहले से करें तैयारी : सबसे पहले आप अपने विचारों और बातें को अच्छी तरह समझ लीजिए मसलन अगर आप किसी को इस बात से सहमत करना चाहते हैं कि एफिल टॉवर, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से ज्यादा लंबा है तब इससे संबंधित सारे आंकड़े पता करें सिर्फ अंदाजा न लगाएं। 

2. फील्ड को अच्छी तरह जानें : कुछ मामलों में आपको आंकड़ों से कहीं ज्यादा जानने की जरूरत रहती है। जैसे कि यदि आप यह साबित करना चाहते हैं कि स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, एफिल टॉवर से ज्यादा सुंदर है तब इसके लिए आपको आकंड़ों के साथ-साथ उनके वास्तु-कला और सौंदर्य-शास्त्र की सारी जानकारी होना जाहिए जिससे आप अपनी बात को प्रभावी रूप से कह सकें। 

इसी तरह यदि आप किसी कार को बेचना चाहते हैं तो आपको उस कार के साथ-साथ उसकी प्रतिस्पर्धी सारी कारों की संपूर्ण जानकारी होनी आवश्यक है। 

3. नम्रतापूर्वक अपनी बात कहें : जहां तक संभव हो आई कॉनटेक्ट बनाए रखें, आपसी सम्मान की भावना बनाए रखें। ‍अगर किसी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि आप उसका सम्मान नहीं करते तब आप उसे कभी अपनी बात से सहमत नहीं करा सकते। इसलिए अपनी बातों को नम्रतापूर्वक कहें। 

4. भरोसा हासिल करें : लोगों को अपनी बात से सहमत कराने के लिए जरूरी है उनका विश्वास जीतना, उन्हें भरोसा दिलाना कि जो आप कह रहे हैं वह सही है। इसके लिए जरूरी है कि आप विषय से संबं‍धित सारी जानकारी एकत्रित कर लें। 

5. ध्यान से सुनें : जिस व्यक्ति को आप सहमत करना चाह रहे हैं, उनकी बातों को भी सुनें, उनके ‍विचारों को भी समझें। उन्हें रियल फेक्ट्स के साथ उनके सवालों के जबाब दें।

6. संकेतों पर ध्यान दें : नॉन-वर्बल फीडबैक जैसे बात को सुनकर सिर हिलाने के संकेतों पर भी ध्यान दें।

7. अडिग रहें : अपने विश्वास पर अडिग रहें। दूसरों के विश्वास की कद्र करें। उन्हें विस्तारपूर्वक बताएं कि आपका यकीन आपके लिए इतना अहम क्यों हैं। 

8. सरल अंदाज : अपनी बात को इस अंदाज में रखें कि लोगों को उसे समझने में आसानी हो। 

9. फॉलो-अप जरूरी : बातचीत के बाद हमेशा फॉलो-अप लें। लोगों से सवाल करें ताकि आप जान सकें कि वे आपकी बात को पूरी तरह समझे हैं या नहीं।

फसल पकने के आनंद का प्रतीक है लोहड़ी

फसल पकने पर किसान की खुशी का ठिकाना नहीं रहता और इसी खुशी को जाहिर करता है लोहड़ी पर्व, जो जीवन के प्रति उल्लास को दर्शाते हुए सामाजिक जुड़ाव को मजबूत भी करता है। लोहड़ी को पंजाब और हरियाणा में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है क्योंकि दोनो ही राज्य कृषि प्रधान हैं और फसल पकने की खुशी भी यहां पूरे जोश के साथ मनाई जाती है। 

पंजाब के लुधियाना में रहने वाली दर्शन कौर ने कहा ‘लोहड़ी का किसी एक जाति या वर्ग से संबंध नहीं है। हमारे पंजाब में तो हर वर्ग के लोग शाम को एकत्र होते हैं और लोहड़ी मनाते हैं। तब सामाजिक स्तर भी नहीं देखा जाता। यह पर्व फसल पकने और अच्छी खेती का प्रतीक है।’

वह कहती हैं ‘जब लोहड़ी जलाई जाती है तो उसकी पूजा गेहूं की नयी फसल की बालियों से की जाती है। हम इस पर्व को अच्छी खेती और फसल पकने का प्रतीक मानते हैं। लोहड़ी आई यानी फसल पकने लगी और फिर खेतों की रखवाली शुरू हो जाती है। बैसाखी तक पकी फसल काटने का समय आ जाता है।’

वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी एस के अवलाश बताते हैं ‘इस दिन का इंतजार बेसब्री से रहता है। लोग शाम को एक जगह एकत्र होते हैं। पूजा कर लोहड़ी जलाई जाती है और इसके आसपास सात चक्कर लगाते समय आग में तिल डालते हुए, ईश्वर से धनधान्य भरपूर होने का आशीर्वाद मांगा जाता है। 

ऐसा माना जाता है कि जिसके घर पर भी खुशियों का मौका आया, चाहे विवाह के रूप में हो या संतान के जन्म के रूप में, लोहड़ी उसके घर जलाई जाएगी और लोग वहीं एकत्र होंगे।’

राजधानी के एक प्रतिष्ठित स्कूल में प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त तेजिंदर कौर कहती हैं ‘बड़े बुजुर्ग मानते हैं कि लोहड़ी नवविवाहितों और नवजात शिशुओं के लिए बेहद शुभ होती है। नवविवाहित जोड़े इस दिन नए कपड़े पहनते हैं। नयी बहू कलाई भर चूड़ियां, नए कपड़े पहन कर सजती है और उसे मायके तथा ससुराल से तोहफे भी मिलते हैं।’ 

दर्शन कौर कहती हैं ‘लोहड़ी अगले दिन सुबह तक जलती है। महिलाएं लोहड़ी की आंच में गुड़ और आटे के ‘मन’ पकाती हैं जिसे बड़े चाव से लोग खाते हैं। कहीं गुड़ के चावल रातभर पकाए जाते हैं और सुबह सबको बांटे जाते हैं। इस रात विशेष भोज होता है जिसमें सरसों का साग, माह की दाल, तंदूरी रोटी और मक्की की रोटी बनती है।’

ढोलक की थाप पर लोकगीतों पर गिद्दा करती महिलाएं जहां लोहड़ी को अनोखा रंग दे देती हैं वहीं ढोल बजाते हुए भांगड़ा करते पुरुष इस पर्व में समृद्ध संस्कृति की झलक दिखाते हैं। ठंड के दिनों में आग के आसपास घूम घूम कर नृत्य करते समय हाथों में रखे तिल आग में डाले जाते हैं। 

अवलाश कहते हैं, ‘लोगों के घर जा कर लोहड़ी जलाने के लिए लकड़ियां मांगी जाती हैं और दुल्ला भट्टी के गीत गाए जाते हैं। कहते हैं कि महराजा अकबर के शासन काल में दुल्ला भट्टी एक लुटेरा था लेकिन वह हिंदू लड़कियों को गुलाम के तौर पर बेचे जाने का विरोधी था। उन्हें बचा कर वह उनकी हिंदू लड़कों से शादी करा देता था। उसे लोग पसंद करते थे। लोहड़ी गीतों में उसके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।’

उन्होंने बताया ‘कुछ लोग मानते हैं कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है। इसीलिए इसे लोई भी कहा जाता है।’ लोहड़ी पौष माह के आखिरी दिन मनाई जाती है और यह अगले दिन यानी माघ के पहले दिन तक जलती रहती है।

लोहड़ी की लकड़ियों के बीच गोबर की एक छोटी ढेरी रखी जाती है और इसे ही लोहड़ी माना जाता है। पूजा के बाद लोहड़ी जलाई जाती है और छोटे बड़ों के पैर छू कर आशीर्वाद लेते हैं। प्रसाद के तौर पर रेवड़ी, पॉपकार्न, मूंगफली, गुड़ और गजक बांटी जाती है। लोग यह भी मानते हैं कि लोहड़ी ठंड की विदाई का प्रतीक है। (भाषा)

Wednesday, 11 January 2012

LOHRI FUNCTION


विवाह तो मैंने भी ‍नहीं किया... कमल संदेश की टिप्पणी पर उमा की चुटकी


FILE
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के शादी नहीं करने के कथित रूप से उदास रहने संबंधी भाजपा के मुखपत्र कमल संदेश में की गई टिप्पणी पर चुटकी लेते हुए तेजतर्रार साध्वी नेता उमा भारती ने बुधवार को कहा कि विवाह तो उन्होंने भी नहीं किया और वह खुश हैं।

उमा ने भाजपा मुख्यायलय में खुशगवार बातचीत के दौरान यह बात कही। उनसे सवाल किया गया था कि ‘कमल संदेश’ में कहा गया है कि राहुल इसलिए दुखी रहते हैं कि उनका विवाह नहीं हुआ है।

साध्वी नेता ने इस सवाल पर हंसते हुए कहा कि आपने गलत व्यक्ति से यह प्रश्न किया है। विवाह तो मैंने भी नहीं किया है। ठहाकों के बीच उन्होंने कहा कि मैंने विवाह नहीं किया है और मैं बहुत संतुष्ट और खुश हूं। शादी मामले से इतर हालांकि उमा ने राहुल को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस गुरु -चेला जोड़ी (दिग्विजयसिंह तथा राहुल गांधी) का एक ही काम है। कभी आजमगढ़ की ‘तीर्थयात्रा’ पर जाना। कभी पैदल चल देना। कभी कहीं खड़े होकर पकौड़े खा लेना। और इस सबमें नाकाम होने के बाद ओबीसी आरक्षण कोटा में से मुसलमानों को कोटा देने का घिनौना काम कर डालना।

उन्होंने कहा कि वे यह नहीं बताएंगी कि इनमें गुरु कौन है और चेला कौन? क्योंकि ये दोनों अपनी गुरु-चेला की भूमिका को समय-समय पर बदलते भी रहते हैं।

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु' योग और आदत स्वास्थ के लिए जरूरी आदतों से छुटकारा पाना


FILE
जरूरी नहीं कि आप बुरी आदतों के शिकार बन गए हों और आप उन्हें छोड़ना चाहते हों। अच्छी आदतें भी नुकसान पहुंचाने वाली सिद्ध हो सकती है या कहें कि किसी भी प्रकार की आदत या लत का होना ही नुकसानदायक है।

तंबाखू और शराब के नशे के चलते व्यक्ति अति भोजन, तनाव, कुंठा, अवसाद, निराशा और नकारात्मक विचार से ग्रस्त हो जाता है। नकारात्मक विचार से जिंदगी में सबकुछ नकारात्मक ही होने लगता है। योग कहता है जैसी मति वैसी गति तो मति को बदलो।

मन और भावनाओं पर विजय प्राप्त करने में योग के अतिरिक्त इस संसार में दूसरी किसी तकनीक से मदद नहीं मिल सकती। अपनी खोई हुई आत्मशक्ति को पुन: प्राप्त करने में योग एक रामबाण औषधि का कार्य करता है।

चित्त से चिपकती आदतें : ‍हमारे मन या चित्त पर किसी भी प्रकार का आदतें चिपक सकते हैं। आदतें बनती है अभ्यास से। जैसे मंत्र जपने का अभ्यास किया तो धीरे-धीरे मंत्र जपने की आदत पड़ जाएगी। फिर जब आप मंत्र नहीं भी जप रहे होंगे तब भी आपके मन में मंत्र चलता रहता है। तब सिद्ध हुआ की दोहराव से आदतों का जन्म होता है।

यदि शराब पीने का अभ्यास किया है तो शराब एक आदत बन जाएगी और यदि दुखी रहने में आनंद को ढूंढा तो जब दुख नहीं होगा तब भी व्यक्ति स्वयं को दुखी ही महसूस करेगा। सब कुछ आदतों का खेल है और आदतें जन्मती है अभ्यास या दोहराव से। मन तो किसी भी अच्छी और बुरी बातों को पकड़ना जानता है।

कैसे छोड़े आदतें :

1.संकल्प प्रणायाम : सर्वप्रथम संकल्प लें कि आदतें छोड़ना है। फिर प्रणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जब भी आपकी तंबाखू खाने, शराब पीने या नकारात्म विचार सोचने की इच्छा या क्रिया शुरू होती है तब आपके श्वासों की गति बदल जाती है। यदि आप इस पर ध्यान देगें तो जल्द ही समझ जाएंगे की प्रणायाम कितना जरूरी है। क्रोध आता है तब श्वासें तेज चलने लगती है और उसी वक्त आप जोर से सिर्फ एक बार भ्रस्त्रिका कर लेते हैं तो क्रोध तुरंत ही तिरोहित हो जाता है।

2.रिवर्स गियर्स : जिस तरह क्रमश: आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है उसी तरह क्रमश: उन्हें जीवन से अलग किया जा सकता है। मान लो कि आप पहले एक दफे तंबाखू खाते थे और फिर अब चार दफे तो तीन, दो और पुन: उसे एक दफे पर लाकर छोड़ दें। यह बहुत आसान है।

3.योग पवित्रता : आप पवित्रता के बारे में सोचे और सोचे कि क्यों आप अपने शरीर और मन को अपवित्र रखना चाहते हैं। पवित्रता सभी धर्मों का मूल है जिसे योग में शौच कहा जाता है। जब भी नकारात्मक विचार आएं आप तुरंत ही एक अच्छा विचार भी सोचे और इस तरह अच्छे विचार की आदत डालें। यदि आप निरंतर योग आसन और प्रणायाम, करते हैं तो यह बहुत आसान होगा।

4.अंतत: आदमी आदतों का पुतला है। चित्त पर किसी भी प्रकार की अच्छी और बुरी आदतों का जाल नहीं होगा तो चित्त निर्दोष और निर्मल रहेगा, जिससे शरीर और मन दोनों ही स्वस्थ्‍य अनुभव करेंगे। तो ध्यान दें अपने खान-पान, अपने व्यवहार और अपने विचार पर। तीनों को ही शुद्ध और बुद्ध बनाने का प्रयास करें। इनके शुद्ध होने से सेहत और खुशी दोनों ही आपको मिलेगी।