Monday, 9 January 2012

मच्छरों को बेवकूफ बनाने की क्रीम

क्या आप जानते हैं कि मानव का सबसे पुराना दुश्मन कौन है? नहीं... तो देश के रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) से पूछिए। जी हाँ, मनुष्य के सबसे पुराने दुश्मन मच्छर के खिलाफ डीआरडीओ ने कमर कस ली है। मच्छरों को बेवकूफ बनाने के लिए कुछ क्रीम बनाई गई है। 

'मैक्सो मिलट्री', 'मैक्सो सेफ' और सॉफ्ट वाइप्स, डीआरडीओ ने ये क्रीम आधारित उत्पाद तैयार किए हैं। इनकी गंध लाजवाब है और दूसरे उत्पादों की तरह यह चमड़ी के रोम छिद्र भी बंद नहीं करेगी। डीआरडीओ के शोध व विकास के मुख्य नियंत्रक प्रहलाद ने कहा कि यह लगाने से मच्छरों को मानव गंध नहीं आएगी। साथ ही इसको लगाने से मच्छरों की समझने की शक्ति गड़बड़ा जाएगी, जिससे वे मानव को नहीं काटेंगे। 

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इस पर शोध व विकास डीआरडीओ ने किया है। इसको ज्योति लैब द्वारा बनाया और बेचा जाएगा। इसको रक्षा सेवा के अलावा बाहर बेचने का लाइसेंस भी मिला है। विशेष तकनीकी के जरिए अपनी तरह का पहला ऐसा क्रीम तैयार किया गया है। इसके लिए डीआरडीओ और फिक्की के बीच इसके व्यवसायीकरण का करार हुआ है। 

सैनिक घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए क्रीम तैयार की गई है। हमेशा इन सैनिकों को मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगु की आशंका रहती है। इसे डायइथाइल फिनाइल एसिटामाइड तकनीक के आधार पर तैयार किया है। इसमें काफी समय से काम चल रहा है और कई सुधार किए गए।

बुढ़ापे में झूठ बोलना आसान नहीं

युवा लोगों के मुकबाले बुजुर्ग लोगों के लिए झूठ बोलना मुश्किल भरा काम होता है और हां, वे झूठ जल्दी से पकड़ भी नहीं पाते। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

ओटागो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस बाबत अध्ययन किया। उन्होंने धोखे पर युवा और बुजुर्ग लोगों के कौशल को जांचा।

‘साइकोलॉजी एंड एजिंग’ मैग्जीन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन के लिए 60 लोगों को लिया गया। उन्हें विभिन्न मुद्दों पर 20 लोगों की वास्तविक राय और झूठी राय की वीडियो क्लिंपिंग दिखाई गई।

समूह में 10 की आयु तीस साल या उससे कम थी और 10 व्यक्तियों की आयु 60 साल या उससे ज्यादा थी। सब को दो-दो क्लिप दिखाए। एक सच बोलता और दूसरा झूठ बोलता।

अनुसंशान के अगुवा प्रो. जैमिन हल्बरस्टाड ने बताया कि अध्ययन में पाया गया कि जब बुजुर्ग लोगों ने झूठ बोला तो सभी के लिए उसे पकड़ना आसान रहा।

प्रो. हल्बरस्टेड ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि बुजुर्ग व्यक्तियों में सफलतापूर्वक झूठ बोल पाने के लिए जरूरी मानसिक क्षमता उम्र के साथ कम होती जाती हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि झूठ के लिए याददाश्त और सामाजिक समझ की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि अपने अध्ययन में हमनें यह भी पाया कि सच और झूठ के बीच भेद कर पाने में भी बुजुर्ग प्रतिभागी युवाओं की माफिक नहीं थे।

वैज्ञानिक ने कहा कि गलती पकड़ पाने में नाकाम रहने की बुजुर्गों को लेकर हुए हमारे अध्ययन और उनके बहुत लंबे समय तक बोलते रहने और मुद्दों से भटक जाने को फिर से अध्ययन की गई परिघटना में खराब प्रदर्शन से जुड़ा पाया गया। 

मच्छर काटने पर खुजली क्यों?

हमें इतना तो पता ही है कि मच्छर हमारा खून चूसने के लिए अपना डंक चुभोते हैं। जो मादा मच्छर हमें काटती हैं वे बहुत चालाक होती हैं क्योंकि हमारा खून चूसने के लिए वो बाल जितना महीन डंक हमारे शरीर में उतारती हैं। 

पर इंसानों के खून में बहुत जल्दी थक्का बन जाता है और मच्छरों को खून चूसने में दिक्कत होती है। 

Khoj Khabar
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इससे बचने के लिए ही मादा मच्छर एक विशेष रसायन हमारे खून में मिला देती हैं और यह रसायन जहरीला होता है। 

हालांकि इसकी मात्रा इतनी कम होती है कि इंसान को कोई खास फर्क नहीं पड़ता है। मच्छर, मधुमक्खी और मक्खियां जब आपको काटती है तो यही कारण होता है कि हमें खुजली होती है। 

जिस जगह मधुमक्खी काटती है उस जगह के जहर से मुकाबला करने के लिए शरीर से हिस्टामिन का स्त्रावण होता है जो उसे बूंद से भी कम जहर का खात्मा कर देता है।

सिरसा लो·सभा क्षेत्र ·े सांसद एवं अखिल भारतीय ·ांग्रेस ·मेटी ·े राष्ट्रीय सचिव डा. अशो· तंवर अपने ए· दिवसीय दौरे पर



सिरसा लो·सभा क्षेत्र ·े सांसद एवं अखिल भारतीय ·ांग्रेस ·मेटी ·े राष्ट्रीय सचिव डा. अशो· तंवर अपने ए· दिवसीय दौरे पर 11 जनवरी ·ो सिरसा आएगें और विभिन्न ·ार्य·्रमों में शिरक्त ·रेगें। यह जान·ारी देते सांसद ·े निजी सचिव परमवीर सिंह ने बताया ·ि सांसद तंवर 11 जनवरी ·ो प्रात: 9 बजे अपने हुड्डा स्थित निवास स्थान पर सिरसा संसदीय क्षेत्र ·े लोगों से मुला·ात ·रेगें और उन·ी समस्याएं सुनेगें। उन्होंने बताया ·ि प्रात: 11 बजे वे रानियां रोड़ स्थित गुरूद्वारा श्री चिल्ला साहिब में बाबा प्रीतम सिंह जी ·ी श्रद्धाजंलि समारोह एवं अंतिम अरदास ·ार्य·्रम में शिर·त ·रेगें। दोपहर 1 बजे वे ·ांग्रेस भवन, सिरसा में ·ार्य·र्ताओं से मिलेगें और उन·ी बैठ· लेगें। सांय 6 बजे सांसद तंवर टोहाना में जादूगर सम्राट शं·र ·े जादूई शो ·ा बतौर मुख्यातिथि उद्घाटन ·रेगें। उल्लेखनीय  है ·ि इन दिनों सांसद तंवर उत्तर प्रदेश विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनावों ·ो ले·र यहां ·े विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों ·े दौरों पर है।


मूर्तियाँ ढंकने से माया मजबूत ही होंगी


आचार्य रजनीश "ओशो'' की किसी पुस्तक में बताया गया है कि मानव के स्वभाव के साथ उत्सुकता जुडी हुई है. इसलिए जिसको जितना दबाओगे या छुपाओगे उसकी ओर उत्सुकता उतनी ही बढती जायेगी. किसी चौराहे पर यदि चारों ओर से पर्दा लगा कर यह लिख दिया जाये कि "इसके अन्दर एक चित्र है, जिसको देखना माना है".  तो आप-पास रहने वाले सभी जन चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, नौजवान हों या वृद्ध, उसको देखने का प्रयत्न अवश्य ही करेंगे, कोई दिन में मौका ढूँढेगा झांकने का तो कोई अंधेरी रात में आकर झांकने का प्रयास करेगा.

इसी प्रकार हाथियों और मायावती की मूर्तियों को ढकने से मायावती और उनकी पार्टी को और अधिक प्रचार मिलेगा चुनाव में, पता नहीं किस दल की शिकायत पर चुनाव आयोग ने यह फैसला दिया है. नीति कहती है कि या तो हटा दो या पूर्णतया अनदेखा कर दो. जिस प्रकार कांग्रेस की आंख की किरकरी बने गये दिल्ली के कनाटप्लेस के मध्य में चल रहे एक प्रसिद्द काफी हॉउस को आपातकाल में उखाड़ कर वहाँ एक बड़ा सा फौवारा बना दिया गया था. आज लोग उस काफी हॉउस को भूल चुके हैं.

कई दिनों से चल रही चर्चा पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने अंततः पटाक्षेप करते हुए उत्तर प्रदेश में उद्यानों और चौराहों पर मायावती की सरकार द्वारा स्थापित की गई हाथियों और मायावती की मूर्तियों को ढकने का आदेश जारी कर ही दिए. चुनाव आयोग के इस आदेश का भाजपा, कांग्रेस, सपा और कई अन्य दलों ने स्वागत किया है. ४ फरवरी से २८ फरवरी तक ७ चरणों में संपन्न होने जा रहे प्रदेश के चौकोने चुनावी संघर्ष में सभी दल चौतरफा मार झेल रहे है तो ऐसे माहोल में चुनाव आयोग के इस फैसले पर अन्य दलों के प्रसन्नता का प्रकटीकरण स्वाभाविक ही है.

चुनाव आयोग के इस निर्णय के औचित्य पर सवाल खड़े करना हमारा काम तो नहीं है, परन्तु बहुजन समाज के नेता सतीश चन्द्र मिश्रा  महामंत्री द्वारा इस फैसले के विरोद्ध में दी गई प्रतिक्रिया पर चर्चा तो अवश्य ही की जा सकती है. बसपा के मिश्रा का यह कथन कि  दलों के चुनाव चिन्ह व नेताओं के इस प्रकार के प्रतीकात्मक चिन्ह तो सभी स्थानों पर मिल जायेंगे, तो क्या उन्हें तो तोडा या ढका जायेगा ? उन्होंने भाजपा, सपा व कांग्रेस के चुनाव चिन्हों का नाम लेते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि क्या यह चिन्ह व मूर्तियाँ भी तोडी या ढकी जायेंगी?

निष्पक्ष रूप से यदि गौर किया जाये तो किसी हद तक बसपा के विरोद्ध में दम लगता है. वैसे तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकारी खर्चे पर लगी मूर्तियों के विषय में ही अपना आदेश सुनाया है और राज्य के तमाम चौराहों पर बने फौवारों पर कमल के फूल बने हुए है या कमल के फूल पर फौवारे बने हुए है. इन सभी का निर्माण वहाँ की नगर पालिकाओं  ने करवाया है जो कि सरकारी खर्चा ही तो है. राजनैतिक दलों के नेताओं की मूर्तियाँ या उनके नाम पर रास्तों या चौराहों का नाम तो सारे देश में ही है. चंडीगढ़ प्रशासन का चिन्ह ही हाथ है. इन सब पर चुनाव आयोग क्या फैसला देगा ? दलों के चुनाव चिन्हों पर इसी प्रकार के आरोप और शिकायतें पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के फूल पर भी अन्य दलों ने लगाये थे और चैनलों पर चलने वाले धार्मिक धारावाहिक जिसमें कमल का फूल दिखाया जा रहा था को बंद करने की मांग की थी. चुनाव आयोग के वर्तमान फैसले पर केवल शरद यादव ने ही सवाल उठाये है अन्य किसी भी दल ने नहीं.

पार्कों और उद्यानों में लगी मूर्तियों को ढकने का काम जहाँ अभी प्रारम्भ ही हुआ है वहीँ इसकी चर्चा देश भर में होने लगी है. पार्क के अन्दर स्थापित मूर्ति किसी को चुनावी लाभ दे सके या न दे सके, परन्तु ढकी हुई मूर्तीयाँ पार्क से बाहर अवश्य ही चर्चा का विषय बन सभी का ध्यान आकर्षित कनरे में सफल होगी.  पार्कों में लगी सूंड उठाये हाथियों की मूर्तियाँ चुनाव में किसी भी प्रकार से प्रचार में सहायक नहीं हो सकती थी. हाँ, इन मूर्तियों को ढकने के कार्य से मीडिया और आम जनमानस में जिस ढंग से प्रचार हो रहा है उसका लाभ अवश्य ही मायावती की बहुजन समाज पार्टी को चुनाव में मिलेगा यह दावे से कहा जा सकता है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी माया सरकार को पलटवार करने और अपने समर्थकों को यह सन्देश देने कि बहुजन समाज के साथ अन्याय हो रहा है, मूर्ति ढकने की घटना अवश्य ही बहुत सहायक होगी.

आपातकाल में कांग्रेस की सरकार ने समाचार पत्रों पर भी सेंसर लगा दिया था. समाचार पत्र छपने से पुर्व उनको सरकार के अधिकारी पढ़ते थे और सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार अमान्य समाचारों को निकाल दिया जाता था. कुछ समय पश्चात् कुछ समाचार पत्रों ने हटाये गए समाचारों का स्थान खाली छोड़ने का कार्य प्रारम्भ कर दिया जिससे आम जनता को समझ में आने लगा कि इस रिक्त स्थान पर लगा समाचार सरकार द्वारा हटाया गया है. फिर देश का जन सामान्य सभी समाचार पत्रों को जांचने लग गया कि कौन सा समाचार पत्र सरकार के विरुद्ध लिखता है और सरकार वह समाचार पत्र हटवा देती है. उत्तर भारत में इस कार्य में शायद पंजाब केसरी ही प्रथम स्थान पर रहा जिसके चलते आज वह पहली पसंद का समाचार पत्र बना हुआ है. अब हो सकता है कि मूर्तियों की शिकायत करनेवाले पछता भी रहे हों.

चुनाव आयोग का एह फैसला उचित है या नहीं इस पर चर्चा करना हमारा लक्ष्य नहीं है. हम तो मात्र यह आंकलन करना चाहते हैं कि इस आदेश से किस को लाभ होगा और किस को हानि ? बसपा के नेता सतीश मिश्रा सर्वोच्च न्यायालय के एक बढ़े वकील हैं, उन्होंने तो कमल, हाथ और साईकिल चुनाव चिन्ह पर भी सवाल खड़े किये हैं. फूल ढकने से तो आम जनता को कोई परेशानी नहीं होने वाली, साईकिल ढकने से केवल कुछ दिनों की परेशानी होगी  परन्तु यदि हाथ को ही ढकने या बांधने के आदेश दे दिए गए, तो जरा सोचिये परिस्थिति कितनी शोचनीय हो जायेगी ? सारा उत्तर प्रदेश २८ फरवरी तक शोले का ठाकुर ( संजीव कुमार ) बन जायेगा और उसके साथ कोई राम लाल भी नहीं हो होगा जो......!

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गायब होने के बाद भी अकाउंट में दिखता रहेगा पैसा

 अगर आप धड़ल्ले से इंटरनेट बैंकिंग करते हैं, तो अब आपको काफी सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर व‌र्ल्ड के अपराधियों की नजर अब उन लोगों पर है जो ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने एक ऐसा खतरनाक वायरस तैयार कर लिया है जो न केवल अकाउंट से पैसा गायब कर देगा बल्कि उस रकम को आश्चर्यजनक रूप से आपके अकाउंट में दिखाता भी रहेगा। इससे अकाउंट होल्डर काफी समय तक यह पता भी नहीं चलेगा कि वह साइबर क्राइम का शिकार बन चुका है। 

स्पाईआई ट्रॉजन हॉर्स सॉफ्टवेयर' नामक वायरस के नए एडिशन के जरिए अमेरिका और ब्रिटेन में कुछ लोगों का अकाउंट साफ किया जा चुका है। यह विंडो आधारित कंप्यूटरों पर हमले कर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बचने के लिए इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके वेब ब्राउजर में 'ऐंटि फिशिंग ऑप्शन' सक्रिय है। 

'ट्रस्टीयर' नाम की सिक्योरियी कंपनी ने इस तरह के हमलों का पता लगाया है। ब्रिटिश टैब्लॉइडडेली मेल' के अनुसार कंपनी ने बताया है कि यह वायरस अकाउंट का पासवर्ड हैक कर लेता है और इसके बाद यह अकाउंट होल्डर के लॉग इन होने का इंतजार करता है। जैसे ही वह अकाउंट खोलता है यह काम करना शुरू कर देता है और रकम गायब होने लगती है। हालांकि, पैसा अकाउंट में ही दिखता रहता है। इसकी वजह से अकाउंट होल्डर को काफी दिनों तक भनक भी नहीं लगती है कि वह साइबर क्राइम का शिकार बन रहा है। यह हाईटेक वायरस ई-मेल के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। 

हालांकि, इस वायरस के हमले से बचा भी जा सकता है। इसके लिए ब्राउजर को हमेशा अपडेट रखना होगा। वैसे तो यह अपने आप अपडेट होता रहता है, इसके बावजूद खुद भी ब्राउजर को अपडेट करते रहना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि ब्राउजर पर ऐंटी फिशिंग ऑप्शन बंद न हो। यह ब्लैकलिस्टेड वेबसाइट्स पर नजर रखेगा और नकली बैंक स्टेटमेंट को अकाउंट तक नहीं पहुंचने देगा।